हिंदू पंचांग में दो ज्येष्ठ होने से इस बार 2018 में होंगे 13 माह
Tuesday, 20/2/2018 | 5:43 UTC+0
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हिंदू पंचांग में दो ज्येष्ठ होने से इस बार 2018 में होंगे 13 माह

हिंदू पंचांग में दो ज्येष्ठ होने से इस बार 2018 में होंगे 13 माह

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365 दिन और 12 माह के बीच तिथियों की घटा-बढ़ में ही ये 13 माह रहेंगे समाहित, 16 मई से 13 जून तक रहेगा अधिकमास

जयपुर। हिंदूपंचांग के अनुसार वर्ष 2018 में दो ज्येष्ठ माह होंगे। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से साल के 365 दिन और 12 माह के बीच ही तिथियों की घटा-बढ़ी में ये दो ज्येष्ठ और इसके 13 माह समाहित रहेंगे। वर्ष 2018 में ज्येष्ठ तो 30 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन अधिकमास की अवधि 16 मई से 13 जून तक रहेगी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। प्राय: हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। इस अवधि में शुभ कार्य नहीं होंगे, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान कथा आदि के आयोजन किए जा सकेंगे। इसके पहले वर्ष 2015 में दो आषाढ़ का अधिकमास था। अब वर्ष 2018 के बाद 2020 में अधिकमास होगा। खास बात यह है कि दो ज्येष्ठ वाला अधिकमास 10 साल बाद रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2007 में ज्येष्ठ में अधिकमास का योग बना था। पं राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर से आगामी नया वर्ष एक जनवरी सोमवार को शुरू होगा और इसके आखिरी दिन 31 दिसंबर को भी सोमवार ही रहेगा। हिंदू पंचांग के हिसाब से हर तीसरे वर्ष में अधिकमास होता है। वर्ष 2018 में 16 मई से 13 जून तक की अवधि अधिकमास की रहेगी। वैसे ज्येष्ठ माह इसके पूर्व 30 अप्रैल से प्रारंभ होकर 27 जून तक रहेगा, परंतु कृष्ण और शुक्ल पक्ष के दिनों के मान से अधिकमास मई जून के मध्य भाग में रहेगा। ज्योतिष ने बताया कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति होना कहते हैं। सौर मास 12 और राशियां भी 12 होती हैं। जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती, तब अधिकमास होता है।
अधिकमास शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होकर कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह और 16 दिन और 36 सेकंड में एक बार यानी हर तीसरे वर्ष में बनती है। ऐसा सूर्य पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढ़ने के कारण होता है। पंडितों का कहना है कि अधिकमास में धार्मिक अनुष्ठान कथा आदि के आयोजन किए जाते हैं, परंतु इस अवधि में विवाह अन्य कोई शुभ कार्य नहीं होते हैं।
2018की शुरुआत और साल का अंत दोनों सोमवार को
पं अक्षय शास्त्री ने बताया कि वर्ष2018 की शुरुआत 1 जनवरी सोमवार से होगी। इसके पूर्व वर्ष 2007 2001 का शुभारंभ भी सोमवार के दिन ही हुआ था। यह भी संयोग ही है कि आगामी नए वर्ष का आखिरी दिन 31 दिसंबर को भी सोमवार रहेगा, जबकि पूर्व के उक्त दोनों सालों का आखिरी दिन भी सोमवार ही था। पंडितों का कहना है कि सोमवार भगवान शंकर के आधिपत्य वाला होता है। शिव कल्याणकारी है। इसलिए उम्मी की जा सकती है कि यह नया वर्ष शुभ फलदायी रहेगा।

अधिकमास होने से इस बार देवशयनी एकादशी 9 जुलाई को
अधिकमासमें लोग सप्त सागर, चौरासी महादेव आदि धार्मिक स्थलों की यात्रा दान-पुण्य करते हैं। इस दौरान 24 मई को गंगा दशहरा पर्व भी मनाया जाएगा। अधिकमास के कारण देवशयनी एकादशी 9 जुलाई को आएगी।

ज्योतिष में चंद्रमास 354 दिन सौरमास 365 दिन का होता है
ज्योतिषमें चंद्रमास 354 दिन सौरमास 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो 3 साल में एक माह से कुछ ज्यादा होता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के लिए धर्मशास्त्रों में अधिकमास की व्यवस्था की गई है।

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