मानसरोवर में होगा देव संस्कृति पुष्टिकरण-लोक आराधन महायज्ञ | www.dharmapravah.com
Wednesday, 12/12/2018 | 10:59 UTC+0
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मानसरोवर में होगा देव संस्कृति पुष्टिकरण-लोक आराधन महायज्ञ

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23 से 26 नवम्बर के मध्य 251 कुंडीय महायज्ञ की तैयारियां शुरू

जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से आगामी 23 से 26 नवम्बर तक शिप्रा पथ थाने के सामने मानसरोवर स्थित वीटी रोड ग्राउंड पर 251 कुंडीय  देव संस्कृति पुष्टिकरण-लोक आराधन महायज्ञ होगा। इसकी तैयारियों को लेकर ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में बैठक आयोजित की गई। इसमें गायत्री परिवार के जोन प्रभारी अम्बिका प्रसाद श्रीवास्तव ने गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं से आह्वान किया वे अभी से महायज्ञ की तैयारियों में जुट जाएं। गायत्री परिवार के युवा कार्यकर्ता ताराचंद पंवार ने कहा कि महायज्ञ की पूर्व तैयारियों की कड़ी में पूरे शहर में एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ और दीपयज्ञों की श्रृंखला शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि महायज्ञ में वे श्रद्धालु ही भाग ले सकेंगे जिन्होंने गायत्री मंत्र का लघु अनुष्ठान अर्थात गायत्री महामंत्र के 24 हजार जाप किए हो या 2400 गायत्री मंत्र लिखे हो। गायत्री महामंत्र लेखन के लिए मंत्र लेखन पुस्तिकाएं गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी में उपलब्ध है। इसके अलावा शहर में प्रभातफेरियां भी निकाली जा रही है। गायत्री परिवार के कार्यकर्ता टोलियां बनाकर इस आयोजन को सफल बनाने के लिए निकलने वाले है। सोशल मीडिया पर भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
गायत्री परिवार के प्रमुख का मिलेगा सान्निध्य: मानसरोवर में होने वाले महायज्ञ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख  डॉ. प्रणव पंड्या-शैल पंड्या उपस्थित रहेंगी। इसके अलावा गायत्री परिवार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों का भी मार्गदर्शन मिलेगा।
जुटेंगे प्रदेशभर के कार्यकर्ता:  गायत्री परिवार के प्रदेशभर के कार्यकर्ता इस महायज्ञ मेेंं शामल होंगे। उल्लेखनीय है कि इस महायज्ञ से पूर्व प्रदेश के चार शहरों में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ होंगे। उनकी पूर्णाहुति के रूप में यह महायज्ञ होगा।
1992 के बाद सबसे बड़ा आयोजन: अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से एसएमएस स्टेडियम में 1992 में 1008 कुंडीय अश्वमेघ महायज्ञ किया गया था। उसी समय ब्रह्मपुरी में गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा आधारशिला रखी गई गायत्री शक्तिपीठ का गुरुमाता भगवती देवी शर्मा ने उद्घाटन किया। जयपुर के महायज्ञ के बाद ही देशभर में अश्वमेघ महायज्ञ की श्रृंखला का सूत्रपात हुआ था। 1992 के बाद जयपुर में यह गायत्री परिवार का यह सबसे बड़ा आयोजन है।

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