गोविंद के मंगला दर्शन करें मंगल ही मंगल.. - www.dharmapravah.com | www.dharmapravah.com
Thursday, 22/8/2019 | 6:45 UTC+0
www.dharmapravah.com
गोविंद के मंगला दर्शन करें मंगल ही मंगल.. - www.dharmapravah.com

गोविंद के मंगला दर्शन करें मंगल ही मंगल..

गोविंद के मंगला दर्शन करें मंगल ही मंगल..
It's only fair to share...Share on FacebookShare on Google+Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn

गुलाबी नगरी के आराध्यदेव गोविंद देवजी….। जहां मंगला से लेकर शयन आरती तक हजारों भक्त आते हैं, गोविंद के दरबार में अपनी अर्जी लगाए हैं और पूरी पाते हैं अपनी मनौती। यह सिटी पैलेस के परिसर में स्थित सूरज महल और विशाल बगीचे में बनवाया गया मंदिर है। जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह गोविंद देवजी का विग्रह वृंदावन से यहां जयपुर लेकर आए थे। बताया जाता है कि इस विग्रह को भगवान कृष्ण के पोते ब्रजनाभ ने निर्मित करवाया था।
इस विग्रह के बनाए जाने के पीछे भी एक कहानी छिपी है। कहा जाता है कि लगभग 5000 साल पहले जब ब्रजनाभ 13 साल का था तब उसने अपनी दादी से पूछा कि परदादा कृष्ण कैसे लगते थे। दादी जिन्होंने कृष्ण को साक्षात देखा था उन्होंने जैसे जैसे कृष्ण की छवि का वर्णन किया वैसे वैसे ब्रजनाभ ने मूर्तियां बनाई। लेकिन पहली मूर्ति में सिर्फ पैर कृष्ण जैसे बने। दूसरे में धड़ और तीसरी में चेहरा। ये तीनों मूर्तियां बाद में मदन मोहनए गोपीनाथ और गोविंद देव कहलाई। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार 16 वीं सदी में बंगाली संत चैतन्य महाप्रभु भागवत पुराण में वर्णित स्थानों की खोज करते हुए वृंदावन पहुंचे और गोविंद देवजी की यह मूर्ति खोज निकाली। बाद में उनके शिष्यों ने भगवान की प्रतिमाओं की सेवा पूजा की। कालखण्ड के उसी दौर में जब तुर्क आक्रान्ताओं का आक्रमण हो रहा था और हिन्दू देवी देवताओं के मंदिर और मूर्तियां खंडित की जा रही थी तब चैतन्य के गौड़ीय संप्रदाय के शिष्यों ने मूर्तियों को बचाने के लिए वृंदावन से अन्यत्र छिपा दिया। और महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने गोविंद की प्रतिमा को अपने संरक्षण में लिया और जब जयपुर स्थापित हुआ तो चंद्रमहल के सामने सूरज महल परिसर में गोविंद की प्रतिमा को स्थापित कराया। कहा जाता है कि राजा के कक्ष से गोविंद की प्रतिमा ऐसी जगह स्थापित की गई जहां से राजा सीधे मूर्ति का दर्शन कर सकें।

गोविंददेवजी का मंदिर चंद्रमहल गार्डन से लेकर उत्तर में तालकटोरे तक विशाल परिसर में फैला हुआ है। इस मंदिर में अनेक देवी देवताओं के भी मंदिर हैं। साथ ही यहां हाल ही निर्मित सभाभवन को गिनीज बुक में भी स्थान मिला है। यह सबसे कम खंभों पर टिका सबसे बड़ा सभागार है। गोविंददेवजी के मंदिर में गौड़ीय संप्रदाय की पीढियों द्वारा ही सेवा पूजा की परंपरा रही है। वर्तमान में अंजनकुमार गोस्वामी मुख्य पुजारी हैं और उनके पुत्र मानस गोस्वामी भी सेवापूजा करते हैं। गोविंद देवजी के मंदिर से सात आरतियां होती है। गर्भग्रह में विशाल चांदी के पाट पर श्यामवर्णी गोविंद, राधा, उनकी सखियों और लड्डूगोपाल आदि की प्रतिमाएं हैं। गर्भग्रह के सामने जगमोहन है जहां विशेष अनुमति से दर्शन करने की व्यवस्था होती है।

गोविंद देव मंदिर की बेवसाइट पर जाने यहां क्लिक करें- http://www.govinddevji.net/default.htm

print

POST YOUR COMMENTS

Your email address will not be published. Required fields are marked *

105339
Users Today : 84
Users Yesterday : 286
This Month : 6230
This Year : 96441
Total Users : 105339
loading...

Contact Us

Email: pravahdharma@gmail.com

Phone: +91 8824877593

Fax: Whatsapp +91 9929038844

Address: Jaipur